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“काइरोप्रैक्टिक” के साथ करें स्वागत “ऋतुराज वसंत” का
“काइरोप्रैक्टिक” एक ऐसी वैकल्पिक चिकित्सा पद्धति है जो विशेष रूप से मेरुदण्ड के यांत्रिक विकारों के सटीक उपचार के जरिए शरीर के समग्र स्वास्थ्य को सुनिश्चित करती है। तंत्रिका तंत्र के इन विकारों के चलते शरीर में स्वास्थ्य संबंधी कई समस्याएं होने लगती हैं। इसलिए सही समय पर यह ट्रीटमेंट लेना जरूरी है और ऋतुराज वसंत का आगमन, इसके लिए सबसे उपयुक्त मौसम माना जाता है।

दरअसल जब आप अपनी रीढ़ की हड्डी के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने पर काम करते हैं, तो अपने केंद्रीय तंत्रिका तंत्र को एक प्रकार की प्रतिरक्षा प्रणाली के युक्त करते हैं, जिसकी मदद से स्वास्थ्य बेहतर होता है। यहां ध्यान देने की बात यह है कि वसंत ऋतु में मौसम सुहावना होने लगता है। जिसे एंजॉय करने के लिए इस दौरान हम बाहर अधिक समय बिताने लगते हैं। जिसके चलते कई लोग एलर्जी आदि समस्याओं से परेशान हो जाते हैं। जब आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली कुशलता से काम करती है, तो यह एलर्जी से लड़ने में सक्षम हो सकती है। एलर्जी आपकी प्रतिरक्षा प्रणाली की प्रतिक्रिया है, इसलिए इस शारीरिक प्रणाली को मजबूत और स्वस्थ रखने के लिए इस मौसम में काइरोप्रेक्टिक ख़ासतौर पर फायदेमंद है।
यह देखभाल का बिल्कुल सही समय है
कई लोग काइरोप्रैक्टर्स को पीठ या गर्दन का डॉक्टर समझते हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि काइरोप्रैक्टिक आपके शरीर के अमूमन हर हिस्से को फायदा पहुंचाता है। इससे बेहतर लचीलेपन, दर्द में कमी, बेहतर एकाग्रता, कम सिरदर्द, और प्रतिरक्षा प्रणाली बेहतर होने समेत शरीर को अनेक फायदे होते हैं।
सेहत सही करती है काइरोप्रैक्टिक देखभाल
वसंत ऋतु अपनी दिनचर्या में नए स्वस्थ परिवर्तन जोड़ने का एक अच्छा समय है। काइरोप्रैक्टिक देखभाल से, आप अपने स्वास्थ्य को सही दिशा में ले जा सकते हैं। वसंत ऋतु वर्ष का एक ताज़ा समय है। हो सकता है कि सर्दियों के दौरान आपने बहुत अधिक खा लिया हो या व्यायाम से परहेज किया हो। शायद गर्म रखने की कोशिश के कारण आपकी मांसपेशियां और टेंडन तंग हो गए हैं। आपकी स्थिति चाहे जो भी हो, काइरोप्रैक्टिक देखभाल आपकी सेहत को फिर से बेहतर बना सकती है।
आगे बढ़ने के लिए तैयार हो जाइए
सर्दियों के मुकाबले वसंत ऋतु में हमारे सक्रिय होने की संभावना अधिक होती है। चाहे वह अधिक व्यायाम हो, अधिक खेल हो या अधिक सैर और लंबी पैदल यात्रा हो ….. वसंत ऋतु में ऐसी गतिविधियां बढ़ जाती है। वह निश्चित रूप से अच्छी बात है, लेकिन अगर आपका शरीर तैयार नहीं है तो इनसे आपको हड्डियों में दर्द की शिकायत भी हो सकती है। काइरोप्रैक्टिक के जरिए हम रीढ़ के प्रतिबंधों को दूर रखने में सक्षम हैं, जिससे निश्चित रूप से तनाव और दर्द में आराम मिलता है। नियमित काइरोप्रैक्टिक समायोजन आपके शरीर को बेहतर स्वास्थ्य प्रदान कर नई-नई ऊर्जावान गतिविधियों के लिए तैयार करता है।
डॉ. ए.के. द्विवेदी
सदस्य- वैज्ञानिक सलाहकार मंडल (आयुष मंत्रालय) भारत सरकार
कार्यपरिषद सदस्य- देवी अहिल्या विश्वविद्यालय इंदौर


